सच्चाई

- Manan Agarwal , Hindi Tarang

2017-02-16

Cultural

वो किसी झरने सी बहती सिसकती आँखों की सच्चाई,
वो ग़ालिब के उन फीके लब्ज़ो की सच्चाई,
वो दिवाली पर जलते उन दियो की
वो ईद की नमाज़ों की, सेवइयों की सच्चाई,
वो ईश्वर की, वो इंसान के अल्लाह की सच्चाई,
इंसानो की इस दुनिया में थोड़ी बची सच्चाई की सच्चाई।

वो खुद से भी तेज़ चलती हवा की सच्चाई,
जो रातो में देखे उन झूठे सपनो की सच्चाई,
वो फूल-फूल झूमते भवरे की
वो दर दर भटकते बंजारे की सच्चाई,
ज़रूरत की शक्ल में, इंसान के लालच की सच्चाई,
इंसान, जितनी बची है उतनी बचा ले रे सच्चाई।

पतझड़ में वो बिखरे पड़े सूखे पत्तों की सच्चाई,
वो तेरे दिल में पलने वाले ख्वाबो की सच्चाई,
वो आंधी में बुझ-बुझ के जलते चिराग की
वो तेरे सच्चे प्यार में छुपे तेरे स्वार्थ की सच्चाई,
काले मन की, इंसान की काली नियत की सच्चाई,
इंसान, नहीं बचेगी ये दुनिया, अगर नहीं बची ये सच्चाई।