याद आया

- Yash Jain , Hindi Tarang

2017-02-16

Cultural

आज फिर वो झूला याद आया |
वो शाम की लालिमा में ,
बेपरवाह और बेफिक्र बस ,
आसमान से भी ऊपर जाना |
इस मतलबी दुनिया की दुनियादारी से ,
कही दूर, बस उड़ जाना ...याद आया |
आज फिर वो बगिया याद आयी |
वो चिड़ियों की चहचाहट के बीच ,
उन फूलों की क्यारियों में ,
कलियों को स्पर्श करना |
घने पेड़ों की छाँव के तले ,
अपना पूरा दिन गुज़ार जाना ...याद आया |
आज फिर वो झरना याद आया |
वो पानी के मधुर संगीत को ,
पर्वत की ध्वनि के साथ ,
जुगलबंदी करते सुनना |
पानी के उस बहाव के संग ,
अपने ही ख्यालों में बह जाना ...याद आया |
आज फिर वो तारे याद आये |
वो चुप - छाप सी रात के आगोश में ,
चाँद की चांदनी के संग ,
टिमटिमाते हुए मुस्कुराना |
हीरो सी उस जगमगाहट के बीच ,
अंधेरी रात काट जाना ...याद आया |
आज फिर तुम याद आये |
वो कभी न ख़तम होने वाली बातें ,
और बातों के बीच यूँ ही ,
तुम्हारे दिल को छू जाना |
तुम्हारी आँखों में आँखे डाल ,
तुम में ही बस डूब जाना ...याद आया |