द ग्रेट वाल ऑफ़ डोê

- Shagun Srivastava , Hindi Tarang

2017-02-16

Cultural

द ग्रेट वाल ऑफ़ डोनाल्ड
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"हम मेक्सिको की सीमा पर एक दीवार खड़ी करेंगे, और उसको बनाने का खर्च हम मेक्सिको से ही वसूलेंगे!"
- डोनाल्ड ट्रम्प
तो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का फैसला सबके सामने है। तमाम अटकलों व अनुमानों, एवं एक राष्ट्रव्यापी मतदान प्रक्रिया के पश्चात डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति चुने गए। नामांकन के समय से ही ये आलोचकों के निशाने पर रहे हैं, व बहुत ही विवादास्पद रहे हैं। इन्हें उदारवादियों ने किन-किन विशेषणों से नहीं नवाजा- नस्लवादी, होमोफोब, मिसोजिनिस्ट व ज़ेनोफ़ोब, परंतु इसके बावजूद इन्हें जीत मिली। पर कैसे?
ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी थे। रिपब्लिकन पार्टी की विचारधारा अमेरिकी रूढ़िवाद के समर्थन में है, तो इस प्रकार रूढ़िवादियों का समर्थन ट्रम्प की ओर था। कई रूढ़िवादियों में नस्लवादिता, होमोफोबिया, मिसोजिनी व ज़ेनोफोबिया की भावनाएं लिप्त हैं, तो इन्हीं लोगों ने ट्रम्प को इन भावनाओं की मूरत बना कर रख दिया, और माना कि मुस्लिमों व मेक्सीकनों के देशनिकाले से ही "अमेरिका पुनः महान बनेगा"। एलजीबीटी कार्यकर्ताओं व नारीवादियों के दमन से ही "अमेरिका पुनः महान बनेगा"। पारंपरिक ईसाई व राष्ट्रवादी भावनाओं का उदय होगा और अमेरिका ईसाई राष्ट्र बनेगा। ट्रम्प की एक चुनावी रैली से एक बार तो अश्वेत छात्रों को भगा दिया गया था।
उपर्युक्त बातें तो जीत का केवल एक पहलू हैं। तो दूसरा पहलू क्या है?
ट्रम्प ने कहा कि वे विदेशों से नौकरियां वापस लाएंगे। गौरतलब है कि कई अमेरिकी कम्पनियाँ अपने उद्योग अन्य देशों में स्थापित करती हैं, (यथा चीन) जहाँ उन्हें सस्ते श्रमिक मिलते हैं। इस कारण अमेरिका में ब्लू कालर श्रमिकों को उचित काम नहीं मिल पाता। ट्रम्प ने अमेरिका के इसी श्रमिक वर्ग को साधा, व उन्हें इनका बहुल समर्थन मिला। इसी "साइलेंट मेजोरिटी" ने ट्रम्प को राष्ट्रपति बनाया।
और उदारवादियों का सबसे बुरा सपना सच हो गया। डेमोक्रेट्स का सबसे बुरा सपना सच हो गया। ट्रम्प की जीत को "अंधेर युग की शुरुआत" की संज्ञा दी जा रही है, परंतु क्या ये संज्ञा उपयुक्त है, यह तो वक़्त ही बताएगा। क्या इस्लामोफोबिया व कट्टर राष्ट्रवाद का उदय होगा? क्या गुलामी का युग फिर आएगा? क्या मेक्सिको की सीमा पर दीवार खडी होगी? क्या अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार होंगे? इन चन्द प्रश्नों ने उदारवादियों की नींद उड़ा रखी है। तो समय है कि आशा करें कि ट्रम्प न उदारवादियों के भयावह सपनो को हकीकत में बदलेंगे, न ही रूढ़िवादियों की आशाओं को पूरी करेंगे। केवल देशहित में काम करेंगे और "अमेरिका पुनः महान बनेगा"।